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28 नवम्बर से शुरू हुआ हॉकी वर्ल्ड कप 2018 आख़िरकार समाप्त हो गया है. मेज़बान भारत हालाँकि क्वार्टरफाइनल में ही हारकर बाहर हो चला था. बीते अठारह वर्ष में ऐसा पहली बार हुआ जब ऑस्ट्रेलिया ख़िताबी मुक़ाबले में जगह न बना सकी हो. यही चीज़ें इस वर्ल्ड कप को ख़ास बनाती हैं.

नीदरलैंड्स और बेल्जियम के बीच 2018 हॉकी वर्ल्ड कप का फाइनल मुक़ाबला खेला गया.  भिड़ंत इतनी रोमांचक रही कि चार के चार क्वार्टर गोल रहित रहे. मैच पेनल्टी शूट-आउट तक जा खिंचा.

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पेनल्टी शूट-आउट में भी रोमांच नहीं हुआ कम

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पेनल्टी शूट-आउट में भी दोनों ही टीमों के बीच एक-दूसरे को हराने की दौड़ कमज़ोर नहीं पड़ी. दोनों टीमों को मिले पांच-पांच मौके, लेकिन एक बार फिर मुक़ाबला बराबरी पर जा अटका. बेल्जियम केवल दो और नीदरलैंड्स भी केवल दो ही बार गेंद को गोल-पोस्ट में पहुंचा सकी.

इसी कारण टीमों को एक-एक मौका और मिला. बेल्जियम ने छठे मौके में गोल दागा, लेकिन नीदरलैंड्स इस मिले मौके को गोल में तब्दील नहीं कर सकी. फलस्वरूप पिछले 48 साल में बेल्जियम, पहली बार हॉकी विश्व विजेता टीम बनने में सफ़ल हुई. नीदरलैंड्स के पास भी मौका था कि वो तीसरा ख़िताब अपने नाम कर, सबसे ज्यादा ख़िताब जीतने की सूची में ऑस्ट्रेलिया की बराबरी कर सके, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.