dilip kumar

बॉलीवुड के महान और चहेते अभिनेताओं में से एक। मुहम्मद युसुफ़ खान उर्फ़ दिलीप कुमार आज 96 वर्ष के हो गए हैं। उनकी कर्मा, शक्ति, सौदागर जैसी फ़िल्में हमेशा उनके फैन्स के दिल में बसी रहेंगी।

उनका जन्म 1922 में पेशावर में हुआ। आज़ादी से पहले ही उनका फ़िल्मी करियर शुरू हो गया था। उनकी पहली फ़िल्म ज्वार-भाटा, 1944 में परदे पर लोगों ने देखी। हालाँकि उस दौर में बड़ा पर्दा नहीं हुआ करता था, लेकिन ज्वार-भाटा को दिलीप कुमार शायद कभी नहीं भुला सकेंगे।

धीरे-धीरे समय बीता, दशक बीते, लेकिन उनका फ़िल्मी करियर एक बार शुरू होने के बाद रुका ही नहीं। दीदार, उड़न-खटोला, नया दौर, देवानंद जैसी क्लासिक फ़िल्मों का हमारे दिलीप कुमार हिस्सा रहे।

क्रिकेटर बनना चाहते थे दिलीप कुमार

एक बार युसुफ़ अपने पिता के साथ नमाज़ पढ़ रहे थे। इसी दौरान लाउड-स्पीकर से आवाज़ आई कि यह बच्चा एक दिन बड़ा आदमी बनेगा और बड़े-बड़े कारनामे करेगा। बस तभी से शुरू हुआ मुहम्मद युसुफ़ से दिलीप कुमार का सफ़र।

Dilip Kumar playing cricket

लेकिन आपको बता दें कि दिलीप कुमार एक क्रिकेटर बनना चाहते थे। दिन-रात उनके दिल और दिमाग में केवल क्रिकेट का ही ख्याल घूमता रहता था। काम के कारण वो मुंबई रहने लगे।

एक दफ़ा उन्हें, कॉलेज में नाटक में हिस्सा लेने के लिए भेजा गया। लेकिन क्रिकेट का भूत इतना सवार था कि उन्होंने नाटक में हिस्सा लेने से साफ़ इंकार कर दिया।

ग़लती से आये एक्टिंग में

बात है 1943 की, बॉम्बे टॉकीज़ की मालकिन, देविका रानी की नज़र दिलीप कुमार साहब पर पड़ी। देविका जी ने दिलीप जी को गौर से देखा और पूछा, क्या एक्टिंग करोगे? लेकिन दिलीप साहब ने कहा कि मुझे एक्टिंग का अ अक्षर तक नहीं पता और आप मुझसे एक्टिंग कराना चाहती हैं। देविका रानी ने कहा, कोई बात नहीं सब सीख जाओगे।

dilip kumar

मजबूरन उन्हें एक्टिंग करनी पड़ी। मजबूरन इसलिए क्योंकि उनके पिता का कारोबार डूब चुका था, परिवार की सभी जिम्मेदारियां बेटे पर आ धमकी थीं। उन्होंने बॉम्बे टॉकीज़ में 1250 रुपया प्रति महीना की नौकरी पर रखा गया।

और पढें – देश की अगली पीटी ऊषा बनने को संघर्ष कर रही युवा एथलीट रिंकू

आख़िरकार वह दौर आया जब उनकी पहली फ़िल्म ज्वार-भाटा पर्दे पर उतरी।

पिता उखड़े-उखड़े से रहने लगे

कुमार साहब के पिता को उनका एक्टिंग का पेशा रास नहीं आया। आलम यह था कि कुछ दिन तक उनके पिता ने उनसे बात तक नहीं की। लेकिन चार साल के अन्तराल के बाद ही वो स्टार बन चुके थे।

dilip kumar

लेकिन इस बीच उन्हें डिप्रेशन का शिकार भी होना पड़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनकी फ़िल्मी ज़िन्दगी, असल ज़िन्दगी पर हावी होने लगी थी। इस कारण उन्होंने कुछ वर्ष फ़िल्में ना करने का फ़ैसला किया।

इसके पच्चीस साल बाद, 1981 में उन्होंने क्रांति से शानदार वापसी की और फ़िल्म सुपर-हिट रही। क्रिकेट से फ़िल्मी दुनिया का उनका सफ़र बेहद ही सुहाना रहा है।

और पढें – वेस्टइंडीज़ टेस्ट सीरीज़ हारने के करीब, 75 रन के स्कोर पर गिरे पांच विकेट